Taddhita Prakarana · ବ୍ୟାକରଣ ଅଧ୍ୟାୟ ୩
ସଂସ୍କୃତ ବ୍ୟାକରଣ · ତଦ୍ଧିତ ପ୍ରକରଣ · ଓଡ଼ିଶା ବୋର୍ଡ ଦଶମ ଶ୍ରେଣୀ · ନିୟମ + ଅଭ୍ୟାସ + Quiz
📖 ପରିଚୟ: ମୂଳଶବ୍ଦ (ପ୍ରାତିପଦିକ)ରେ ଭାବ, ସନ୍ତାନ, ଉତ୍କର୍ଷ, ଅପକର୍ଷ, ସମୂହ, ‘ଅଛି’ ଭଳି ଅର୍ଥରେ ଯେଉଁ ପ୍ରତ୍ୟୟ ଯୋଗ ହୁଏ ତାହା ତଦ୍ଧିତ ପ୍ରତ୍ୟୟ। ଅପତ୍ୟାର୍ଥକ, ସମୂହାର୍ଥକ, ଜାତାର୍ଥକ, ଅସ୍ତି-ଅର୍ଥକ, ଆଚରଣ/ସମୟ ଓ ତୁଳନାର୍ଥକ ଭେଦ।
ମୂଳଶବ୍ଦ (ପ୍ରାତିପଦିକ)ରେ ଭାବ, ସନ୍ତାନ, ଉତ୍କର୍ଷ, ଅପକର୍ଷ, ସମୂହ ଓ ‘ଅଛି’ ଭଳି ଅର୍ଥରେ କେତେକ ପ୍ରତ୍ୟୟ ଯୋଗ କରି ନୂତନ ଶବ୍ଦ ତିଆରି ହୁଏ — ଏହି ପ୍ରତ୍ୟୟକୁ ତଦ୍ଧିତ ପ୍ରତ୍ୟୟ ଓ ଗଠିତ ଶବ୍ଦକୁ ତଦ୍ଧିତାନ୍ତ ଶବ୍ଦ କୁହାଯାଏ। ଯଥା — रामः दाशरथिः (दशरथस्य पुत्रः), सौन्दर्यम् (सुन्दर+ष्यञ्), उच्चतमः (उच्च+तमप्), गुणवान् (गुण+मतुप्), श्रेष्ठः (प्रशस्य+इष्ठन्), भारतीयः (भारत+छ)।
अण् (अ):
अञ् (अ):
ण्य (य): दिति+ण्य = दैत्यः · अदिति+ण्य = आदित्यः
इञ् (इ):
फक् (आयन): नार+फक् = नारायणः · बादर+फक् = बादरायणः
यञ् (य): पुलस्ति+यञ् = पौलस्त्यः · याज्ञवल्क+यञ् = याज्ञवल्क्यः
ढक् (एय):
छ (ईय) / छण् (ईय): स्वस+छ = स्वस्रीयः (ଭଣଜା) · पितृष्वस+छण् = पैतृष्वस्रीयः · भ्रातृ+छण् = भ्रात्रीयः (ଭାଇର ପୁଅ)
घ (ईय): क्षत्र+घ = क्षत्रियः (क्षत्रे/राष्ट्रे साधुः) · राष्ट्र+घ = राष्ट्रियः
मतुप् (मत्/वत्): ‘ଯାହାର ଅଛି’ —
इनि (इन्): ‘ଯାହାର ଅଛି’ —
ବିଶେଷ ବିଧିରେ इनि: हस्त+इनि = हस्ती (ହାତୀ) · कर+इनि = करी (ହାତୀ) · दन्त+इन् = दन्ती (ହାତୀ) · केशर+इन् = केशरी (ସିଂହ)। କିନ୍ତୁ हस्त+मतुप् = हस्तबान् (ମନୁଷ୍ୟ)। ‘याचक’ ଅର୍ଥରେ अर्थ+इनि = अर्थी; ‘ଧନ ଅଛି’ ଅର୍ଥରେ अर्थ+मतुप् = अर्थबान् (ଧନୀ)। ଏହିପରି पद्मिनी, कुमुदिनी, तरङ्गिणी, तटिनी ଇତ୍ୟାଦି।
बिनि (बिन्):
ठन् (इक): दण्ड+ठन् = दण्डिकः · श्रम+ठन् = श्रमिकः · धन+ठन् = धनिकः · माया+ठन् = मायिकः
श (ବହୁ/ବାରମ୍ବାର ଅର୍ଥ): लोम+श = लोमशः · बहु+श = बहुशः · क्रम+श = क्रमशः
ठक् (इक) — ଆଚରଣ/ଅଧ୍ୟୟନ:
ठञ् (इक) — ସମୟ: मास+ठञ् = मासिकः · बर्ष+ठञ् = बार्षिकः
तरप् (तर) / ईयसुन् (ईयस्) — ଦୁଇଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ତୁଳନା। तमप् (तम) / इष्ठन् (इष्ठ) — ଅନେକ ମଧ୍ୟରେ। ତଳ ସାରଣୀ ଦେଖ —
| ମୂଳ ଶବ୍ଦ | तरप् / ईयसुन् (ପୁଂ) | तमप् / इष्ठन् (ପୁଂ) |
|---|---|---|
| गुरु | गुरुतरः / गरीयान् | गुरुतमः / गरिष्ठः |
| लघु | लघुतरः / लघीयान् | लघुतमः / लघिष्ठः |
| प्रशस्य | प्रशस्यतरः / श्रेयान् | प्रशस्यतमः / श्रेष्ठः |
| बृद्ध | बृद्धतरः / ज्यायान् | बृद्धतमः / ज्येष्ठः (बर्षिष्ठः) |
| युवा | युवतरः / यवीयान् (कनीयान्) | युवतमः / यविष्ठः (कनिष्ठः) |
| प्रिय | प्रियतरः / प्रेयान् | प्रियतमः / प्रेष्ठः |
ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ: गुरुतरा/गरीयसी, गुरुतमा/गरिष्ठा · କ୍ଲୀବ: गुरुतरम्/गरीयः, गुरुतमम्/गरिष्ठम्
ସମ୍ବନ୍ଧବାଚକ: मातृ+ढुलच् = मातुलः (ମାମୁଁ) · पितृ+ब्यत् = पितृब्यः (ବାପା ଭାଇ) · पितृ+डामहच् = पितामहः · मातृ+डामहच् = मातामहः
💡 ଉତ୍ସ: BSE ଓଡ଼ିଶା ଦଶମ ଶ୍ରେଣୀ ସଂସ୍କୃତ ବ୍ୟାକରଣ (संस्कृतव्याकरणप्रकाशः) — ତଦ୍ଧିତ ପ୍ରକରଣ (ପୃଷ୍ଠା ୪୮–୫୪)।
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