हिन्दी (गद्य) · CBSE Class 9 · गंगा · पाठ 4: ऐसी भी बातें होती हैं (साक्षात्कार) · 25 क्विज़
पाठ 4 — ऐसी भी बातें होती हैं (परिचय, सार, शब्दार्थ)
यह ‘गंगा’ (कक्षा 9) के गद्य खंड की चौथी रचना है — एक साक्षात्कार (इंटरव्यू), जिसमें यतीन्द्र मिश्र ‘भारत रत्न’ लता मंगेशकर से उनके संगीत, परिवार और जीवन-मूल्यों पर बातचीत करते हैं।
साक्षात्कारकर्ता परिचय — यतीन्द्र मिश्र
जन्म सन् 1977, अयोध्या (उ.प्र.)। लखनऊ विश्वविद्यालय से हिन्दी में एम.ए.। कवि व संस्कृति-अध्येता। काव्य-संग्रह — यदा-कदा, अयोध्या तथा अन्य कविताएँ, ड्योढ़ी पर आलाप; शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी पर पुस्तक ‘गिरिजा’; अर्द्धवार्षिक पत्रिका ‘सहित’ का संपादन। लता मंगेशकर का जन्म इंदौर (म.प्र.) में; मात्र पाँच वर्ष की आयु में पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर से संगीत-शिक्षा आरंभ की।
पाठ-सार
इस आत्मीय साक्षात्कार में लता जी बताती हैं कि उनके पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर बिना कुछ कहे केवल गंभीर दृष्टि से ही बच्चों को अनुशासित कर देते थे; वे संगीत में डूबे रहते, म्यूज़िकल ड्रामा करते और राग गाते-गाते सुर बदलकर नया राग रच देते थे। पिता से लता जी ने सबसे बड़ी सीख स्वाभिमान पाई — “अगर कोई बात सही लगे तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की ज़रूरत नहीं।” पिता के निधन (सन् 1942, जब वे मात्र 13 वर्ष की थीं) के बाद उन्होंने कर्तव्यनिष्ठा से पूरे परिवार को सँभाला।
वे बचपन में फ़िल्मों की नकल (‘संत तुकाराम’ का स्वर्ग-दृश्य), अपने कुछ फ़िल्मों में अभिनय (जो उन्हें पसंद नहीं आया), ‘छत्रपति शिवाजी’ में दो पंक्तियाँ गाने, दिन-रात एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो दौड़ती रेकॉर्डिंग और परिवार के लिए कमाने की धुन का ज़िक्र करती हैं। वे बचपन के सपने (पिता व कुमार गंधर्व जैसे मेडल), पुराने व नए संगीतकारों की तुलना (‘आएगा आने वाला’ यदि रहमान बनाते तो?), रंगों से परहेज़ व होली/रंग-पंचमी/गुड़ी पड़वा की महाराष्ट्रीय परंपराएँ, दीवाली पर संगीतकारों को मिठाई देने का नौशाद वाला किस्सा, और मंगलागौर जैसे लोक-उत्सवों के गीतों को याद करती हैं।
कोरस की लड़कियों से उनका संबंध आत्मीय था। संगीत की शक्ति पर वे उस्ताद अली अकबर खाँ का प्रसंग सुनाती हैं — “जब बहुत सुर में तार लगता है, तो टूट जाता है” — जिससे वे मानती हैं कि संगीत में असीम शक्ति है (तानसेन के दीपक/मेघ राग की कथाएँ)। अंत में अमरता पर वे मराठी कहावत कहती हैं — ‘गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन’ (गाँव बह जाता है, पर नाम रह जाता है): उनका गाना अमर है, शरीर नहीं; सबसे बड़ी खुशी यह कि उन्होंने पिता का नाम आगे बढ़ाया।
मूल भाव: साक्षात्कार से लता मंगेशकर की सादगी, समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा, स्वाभिमान, कृतज्ञता व विनम्रता की छवि उभरती है — साथ ही संगीत की अपार शक्ति और बदलते समय में लुप्त होती सांगीतिक-सांस्कृतिक परंपराओं का चित्र भी।
विधा — साक्षात्कार
साक्षात्कार वह विधा है जिसमें एक व्यक्ति प्रश्न पूछता है और दूसरा उत्तर देता है। इसमें आमंत्रण-स्वागत-परिचय, प्रश्नोत्तर, संस्मरण, विचार-उदाहरण, भावनात्मक वातावरण व समापन होते हैं।
शब्द-संपदा (शब्दार्थ)
अप्रतिम = बेजोड़, अनुपम; आकंठ = कंठ तक, पूर्ण रूप से; समर्पित = सौंपा हुआ; रागदारी = ठीक राग गाने का ढंग; पाश्र्वगायन = नेपथ्य में बैठकर गाना; सबब = कारण; अलबत्ता = निस्संदेह; वाकया = घटना; खैरियत = कुशल; फाग/धमार = फागुन के गीत/ताल; सोहर = जन्म का मंगलगीत; बधावा = बधाई; मसलन = उदाहरणस्वरूप; अप्रत्याशित = जिसकी आशा न हो; अतिरेक = आवश्यकता से अधिक; वाजिब = उचित; स्वाभिमान = आत्मसम्मान; बैकुंठ = स्वर्ग।
अभ्यास — सभी प्रश्न-उत्तर
‘ऐसी भी बातें होती हैं’ (साक्षात्कार) के ‘मेरे उत्तर मेरे तर्क’, ‘मेरी समझ मेरे विचार’, व्यक्तित्व-विश्लेषण, ‘मेरे प्रश्न’, साक्षात्कार की पड़ताल एवं व्याकरण (मुहावरे, भाषा-संगम) के पूर्ण उत्तर।
1मेरे उत्तर मेरे तर्क — लता जी ने अपने पिताजी से क्या-क्या सीखा?
(ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना। पिता ने सिखाया कि सही बात के लिए खड़े रहो और किसी के आगे हाथ न पसारो — यही संस्कार जीवन-भर उनके काम आया।
2पिताजी की मृत्यु के बाद परिवार सँभालने का निर्णय किस जीवन-मूल्य का द्योतक है?
(घ) कर्तव्यनिष्ठा। मात्र 13 वर्ष की आयु में माँ व छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी उठाना उनके कर्तव्य-बोध व समर्पण को दर्शाता है।
3‘मंगलागौर’ के वर्णन से भारतीय समाज की कौन-सी परंपरा उजागर होती है?
(घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका। विवाह जैसे अवसरों पर स्त्रियों का मिल-जुलकर गाना-नाचना दिखाता है कि संगीत हमारे सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न अंग है।
4‘गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन’ — इस कहावत का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?
(घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं। गाँव (शरीर/संसार) बह जाता है, पर नाम (कर्म/कीर्ति) बना रहता है।
5कोरस में साथ गाने वाली लड़कियों के साथ लता जी के संबंध कैसे थे?
(ग) आत्मीय। वे उन्हें घर जैसा मानती थीं, स्टूडियो में जमीन पर साथ बैठकर बातें करतीं — संबंध अपनेपन व स्नेह का था।
6हरिदास और तानसेन की कथाओं से लता जी क्या निष्कर्ष निकालती हैं?
(घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है। वे मानती हैं कि सच्चे सुर में कुछ अप्रत्याशित घट सकता है (अली अकबर खाँ के सरोद का तार टूटना इसका उदाहरण)।
7पूरे साक्षात्कार में लता मंगेशकर की जो छवि बनती है, वह मुख्यतः कैसी है?
(क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की। वे विनम्र, कृतज्ञ, परिवार व संगीत के प्रति समर्पित तथा स्वाभिमानी व्यक्तित्व के रूप में उभरती हैं।
MSमेरी समझ मेरे विचार
1. पिता का अनुशासन भय नहीं, सम्मान पर टिका था — वे बिना डाँटे केवल गंभीर दृष्टि से समझा देते थे, और बाद में प्यार से ‘जाओ, खेलो’ कह देते; यही अनुशासन व स्नेह का संतुलन है। 2. पिता का गहरा प्रभाव — स्वाभिमान से जीना, सही बात पर अडिग रहना, किसी के आगे हाथ न पसारना, संगीत के प्रति समर्पण; यही उनके हर निर्णय व व्यवहार में झलकता है। 3. ‘नाम आगे बढ़ाना’ उनके लिए केवल प्रसिद्धि नहीं, बल्कि पिता की कला, संस्कार व प्रतिष्ठा को सम्मानपूर्वक जारी रखने का उत्तरदायित्व है। 4. सहयोगियों (कोरस लड़कियों, संगीतकारों) से उनके संबंध आत्मीय, स्नेहपूर्ण व सम्मानजनक थे — वे उन्हें परिवार जैसा मानती थीं।
CHHVIसाक्षात्कार से उभरता व्यक्तित्व — पंक्ति से गुण
1. ‘मुझे अपने गाने और रेकॉर्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज की सुध नहीं रहती थी।’ → एकाग्रता / समर्पण / साधना। 2. ‘अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।’ → स्वाभिमान / दृढ़ता / स्पष्टवादिता। 3. ‘आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है।’ → विनम्रता / कृतज्ञता। 4. ‘मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।’ → दार्शनिकता।
MPमेरे प्रश्न — दिए गए उत्तरों से प्रश्न बनाइए
उत्तर 1 (‘मंगलागौर’ जैसे लोक-पर्वों में स्त्रियों के बीच गीत, नृत्य व सौहार्द झलकता था) के लिए — (i) ‘मंगलागौर’ उत्सव में स्त्रियाँ क्या करती थीं? (ii) लता जी ने किस लोक-उत्सव का वर्णन किया और उसमें कैसा वातावरण होता था? उत्तर 2 (तकनीकी प्रगति के बावजूद पुराने संगीतकारों की सादगी व गहराई अद्वितीय थी) के लिए — (i) पुराने संगीतकारों के विषय में लता जी का क्या मानना था? (ii) लता जी ने पुराने और नए संगीत की तुलना करते हुए क्या कहा?
SPसाक्षात्कार की पड़ताल — मुख्य बिंदु (पंक्ति सहित)
नाम/परिचय: ‘यतीन्द्र मिश्र’ (प्रश्नकर्ता) व ‘लता मंगेशकर’ (उत्तरदाता)। आमंत्रण-स्वागत: ‘दीदी, आपके संगीत की अप्रतिम यात्रा पर बातचीत शुरू करते हैं…’। उत्तर-शैली का संकेत: ‘जी, जरूर। आप पूछिए, मैं आपके प्रश्नों का जवाब देने के लिए तैयार हूँ।’ भावनात्मक वातावरण: ‘(हँसते हुए)’, ‘(खिलखिलाकर हँसती हैं)’। संस्मरण: पिता का अनुशासन, ‘संत तुकाराम’ की नकल, नौशाद वाला दीवाली किस्सा, अली अकबर खाँ के सरोद का तार टूटना। विचार-उदाहरण: समय-चक्र/टाइम-मशीन वाला प्रश्न व उत्तर। समापन: ‘…यही प्रार्थना है।’ यह शैली औपचारिक नहीं, आत्मीय बातचीत की है — ‘दीदी’, ‘बाबा’ जैसे संबोधन व हँसी-मज़ाक इसे घरेलू व आत्मीय बनाते हैं।
VY1व्याकरण — ‘हाथ’ वाले मुहावरे (अर्थ)
‘हाथ पसारना/फैलाना’ = माँगना/याचना करना। अन्य — हाथ में आना = प्राप्त होना/वश में आना; हाथ का मैल होना = तुच्छ/महत्वहीन होना (धन); हाथ से हाथ मिलाना = सहयोग/मित्रता करना; हाथ साफ करना = चुरा लेना/हड़पना; हाथ से निकल जाना = अवसर या वस्तु खो देना; हाथ धो बैठना = खो देना, वंचित हो जाना। (प्रत्येक का वाक्य में प्रयोग कीजिए।)
VY2हमारी भाषाएँ / भाषा-संगम
मराठी कहावत ‘गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन’ का भाव अपनी क्षेत्रीय भाषा में लिखिए; अपनी मातृभाषा की एक कहावत चुनकर उसका हिन्दी अनुवाद कीजिए और देखिए कि भाव में क्या अंतर आया। ‘संगीत’ शब्द विभिन्न भारतीय भाषाओं में — संस्कृत: सङ्गीतम्; उर्दू: मौसिकी; तमिल: संगीतम्/इशै; मणिपुरी: ईशै; बांग्ला/ओड़िआ/कन्नड़: संगीत — इस विविधता पर कक्षा में चर्चा कीजिए।