୧. टाप् (आ) ପ୍ରତ୍ୟୟ
ଅକାରାନ୍ତ ପୁଂଲିଙ୍ଗ ଶବ୍ଦରେ ପ୍ରାୟତଃ टाप् (आ) ଲାଗି ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ ହୁଏ।
अज = अजा
वृद्ध = वृद्धा
शुक = शुका
कोकिल = कोकिला
बाल = बाला
चतुर = चतुरा
अश्व = अश्वा
सुत = सुता
प्रथम = प्रथमा
मूषिक = मूषिका
पूर्व = पूर्वा
द्वितीय = द्वितीया
शिव = शिवा
चपल = चपला
तृतीय = तृतीया
छात्र = छात्रा
वत्स = वत्सा
कृश = कृशा
शिष्य = शिष्या
चटक = चटका
वीर = वीरा
समान = समाना
अपर = अपरा
पाप = पापा
ଇଷ୍ଠନ୍ (श्रेष्ठार्थ) ପ୍ରତ୍ୟୟାନ୍ତ ପଦରେ ମଧ୍ୟ टाप् —
ज्येष्ठ = ज्येष्ठा
गरिष्ठ = गरिष्ठा
श्रेष्ठ = श्रेष्ठा
कनिष्ठ = कनिष्ठा
वरिष्ठ = वरिष्ठा
प्रेष्ठ = प्रेष्ठा
लघिष्ठ = लघिष्ठा
नेदिष्ठ = नेदिष्ठा
पटिष्ठ = पटिष्ठा
ମନେରଖतर, तम, ईष्ठ ପ୍ରତ୍ୟୟାନ୍ତ ତଦ୍ଧିତପଦର ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ ପାଇଁ टाप् (आ) ଲାଗିଥାଏ।
ତରପ୍ (तरप्) —
गुरुतर = गुरुतरा
दीर्घतर = दीर्घतरा
प्रियतर = प्रियतरा
लघुतर = लघुतरा
पटुतर = पटुतरा
दूरतर = दूरतरा
क्षिप्रतर = क्षिप्रतरा
मृदुतर = मृदुतरा
सरलतर = सरलतरा
ତମପ୍ (तमप्) —
गुरुतम = गुरुतमा
वृद्धतम = वृद्धतमा
दीर्घतम = दीर्घतमा
लघुतम = लघुतमा
क्षुद्रतम = क्षुद्रतमा
सरलतम = सरलतमा
प्रियतम = प्रियतमा
बृहत्तम = बृहत्तमा
युवतम = युवतमा
ମନେରଖକୃଦନ୍ତ क्त, शानच्, तव्य ଓ अनीय ପ୍ରତ୍ୟୟାନ୍ତ ପଦରେ टाप् ଲାଗି ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ ହୁଏ।
କ୍ତ (क्त) —
गत = गता
पठित = पठिता
जात = जाता
दृष्ट = दृष्टा
लिखित = लिखिता
दृढ = दृढा
नीत = नीता
श्रुत = श्रुता
हत = हता
ଶାନଚ୍ (शानच्) —
सेवमान = सेवमाना
वर्धमान = वर्धमाना
लभमान = लभमाना
विद्यमान = विद्यमाना
शयान = शयाना
ईक्षमाण = ईक्षमाणा
ତବ୍ୟ (तव्य) —
द्रष्टव्य = द्रष्टव्या
पठितव्य = पठितव्या
नेतव्य = नेतव्या
श्रोतव्य = श्रोतव्या
दातव्य = दातव्या
हन्तव्य = हन्तव्या
ଅନୀୟ (अनीय) —
पठनीय = पठनीया
पानीय = पानीया
ग्रहणीय = ग्रहणीया
दानीय = दानीया
श्रवणीय = श्रवणीया
स्मरणीय = स्मरणीया
ମନେରଖକ୍ରୋଡାଦି ଶବ୍ଦ ଓ ବହୁସ୍ୱରାନ୍ତ ପଦରୁ टाप् ଲାଗି ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ ହୁଏ। ଅଙ୍ଗବାଚକ ପଦ ପୂର୍ବରେ ସହ (स), ନଞ୍ (अ) ଆଦି ଲାଗିଥିଲେ ମଧ୍ୟ टाप् ଲାଗେ।
सुक्रोड = सुक्रोडा
सकेश = सकेशा
महाललाट = महाललाटा
सुनख = सुनखा
अकेश = अकेशा
शूर्पणख = शूर्पणखा
सुमुख = सुमुखा (ଶାଳା)
सुमुख = सुमुखी (ନାରୀ)
सनासिक = सनासिका
गौरमुख = गौरमुखा
सुभग = सुभगा
कालमुख = कालमुखा
ଣ୍ୱୁଲ୍/अक ପ୍ରତ୍ୟୟାନ୍ତ (कारकादि) —
कारक = कारिका
अध्यापक = अध्यापिका
पाठक = पाठिका
पाचक = पाचिका
साधक = साधिका
नायक = नायिका
शिक्षक = शिक्षिका
लेखक = लेखिका
गायक = गायिका
बालक = बालिका
याचक = याचिका
दर्शक = दर्शिका
ग्राहक = ग्राहिका
सेवक = सेविका
ମନେରଖटाप् ପ୍ରତ୍ୟୟ ହେଲେ ପ୍ରତ୍ୟୟରୁ ପୂର୍ବବର୍ତ୍ତୀ ‘क’ କାରର ‘अ’ କାର ସ୍ଥାନରେ ‘इ’ କାର ହୁଏ (कारक → कारिका)। ମାତ୍ର, नर्तक ଶବ୍ଦର ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ नर्तकी ହୁଏ (ଅପବାଦ)।
सूतक = सूतका / सूतिका
पुत्रक = पुत्रका / पुत्रिका
वृद्धारक = वृद्धारका / वृद्धारिका
ମନେରଖକେତେକ टाप् ପ୍ରତ୍ୟୟାନ୍ତ ପଦର ବିକଳ୍ପ ରୂପ ଥିଲେ ମଧ୍ୟ ଅର୍ଥ ସମାନ ରୁହେ; ଆଉ କେତେକର ଦୁଇଟି ଭିନ୍ନ ରୂପ ଭିନ୍ନ ଅର୍ଥ ପ୍ରକାଶ କରେ।
तारक = तारका (ନକ୍ଷତ୍ର), तारिका (ରକ୍ଷାକାରିଣୀ)
वर्षक = वर्षका (ଉତ୍ତରୀୟ), वर्षिका (ସ୍ତୋତ୍ରକାରିଣୀ / ରଙ୍ଗତୂଳିକା)
वर्धक = वर्धका, वर्धिका (ବଲିତା)
୨. डाप् / ङीष् (ई) ପ୍ରତ୍ୟୟ
କେତେକ ଶବ୍ଦର ଶେଷରେ डाप्/ङीष् (ई) ଲାଗି ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ ହୁଏ।
नद = नदी
काक = काकी
नट = नटी
गौर = गौरी
व्याघ्र = व्याघ्री
कुमार = कुमारी
मृग = मृगी
देव = देवी
तरुण = तरुणी
सिंह = सिंही
घोटक = घोटकी
सुन्दर = सुन्दरी
हय = हयी
ईश्वर = ईश्वरी
खनक = खनकी
नृ/नर = नारी
गवय = गवयी
रजक = रजकी
पितामह = पितामही
तादृश = तादृशी
ईदृश = ईदृशी
मातामह = मातामही
यादृश = यादृशी
कीदृश = कीदृशी
धार्मिक = धार्मिकी
मानुष = मानुषी
मानव = मानवी
ମନେରଖमनुष्य ଓ मत्स्य ଶବ୍ଦରୁ ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗରେ ‘य’ ଲୋପ ପାଏ — मनुष्य = मनुषी, मत्स्य = मत्सी।
ମନେରଖ (मतुप्)मतुप् ପ୍ରତ୍ୟୟାନ୍ତ ଏବଂ मतुप्ର ‘वत्’ ଆଦେଶ ହୋଇଥିବା ପଦରେ डीप् ଲାଗି ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ ହୁଏ।
बुद्धिमत् = बुद्धिमती
श्रीमत् = श्रीमती
धीमत् = धीमती
गुणवत् = गुणवती
धनवत् = धनवती
बलवत् = बलवती
वेगवत् = वेगवती
रूपवत् = रूपवती
लक्ष्मीवत् = लक्ष्मीवती
आयुष्मत् = आयुष्मती
ମନେରଖତଦ୍ଧିତ इन्, मिन्, विन् ପ୍ରତ୍ୟୟାନ୍ତ ପଦରୁ डीप् ଲାଗି ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ ହୁଏ।
धनिन् = धनिनी
तेजस्विन् = तेजस्विनी
यशस्विन् = यशस्विनी
मन्त्रिन् = मन्त्रिणी
मनस्विन् = मनस्विनी
वाग्मिन् = वाग्मिनी
ज्ञानिन् = ज्ञानिनी
तपस्विन् = तपस्विनी
मानिन् = मानिनी
स्रोतस्विन् = स्रोतस्विनी
अहङ्कारिन् = अहङ्कारिणी
पयस्विन् = पयस्विनी
ମନେରଖକୃଦନ୍ତ क्तवतु (वत्) ପ୍ରତ୍ୟୟାନ୍ତ ପଦରୁ डीप् ଲାଗି ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ ହୁଏ।
गतवत् = गतवती
दत्तवत् = दत्तवती
पठितवत् = पठितवती
दृष्टवत् = दृष्टवती
हतवत् = हतवती
जितवत् = जितवती
नीतवत् = नीतवती
ज्ञातवत् = ज्ञातवती
पातवत् = पातवती
ମନେରଖईयसुन् (ईयस्) ପ୍ରତ୍ୟୟାନ୍ତ ପଦରୁ डीप् ଲାଗି ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ ହୁଏ।
महीयस् = महीयसी
ज्यायस् = ज्यायसी
कनीयस् = कनीयसी
गरीयस् = गरीयसी
वर्षीयस् = वर्षीयसी
प्रेयस् = प्रेयसी
लघीयस् = लघीयसी
पटीयस् = पटीयसी
श्रेयस् = श्रेयसी
ମନେରଖ (शतृ)କୃଦନ୍ତ शतृ (अत्) ପ୍ରତ୍ୟୟାନ୍ତ ପଦରେ डीप् ଲାଗି ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ ହୁଏ।
गच्छत् = गच्छन्ती
सत् = सती
पठत् = पठन्ती
भवत् = भवन्ती
पश्यत् = पश्यन्ती
विभ्यत् = विभ्यती
पिबत् = पिबन्ती
कुर्वत् = कुर्वती
तिष्ठत् = तिष्ठन्ती
शासत् = शासती
ଶତୃ (अञ्चन्त) / ଦିଗ୍ବାଚକ —
प्राच् = प्राची, प्राञ्ची
उदच् = उदीची, उदञ्ची
प्रत्यच् = प्रतीची, प्रत्यञ्ची
अवाच् = अपाची, अवाची, अवाञ्ची
ଦିଗ୍ବାଚକ ଓ ଋକାରାନ୍ତ ପଦରୁ डीप् —
दातृ = दात्री
विधातृ = विधात्री
शिक्षयितृ = शिक्षयित्री
नेतृ = नेत्री
सवितृ = सवित्री
द्रष्टृ = द्रष्ट्री
कर्तृ = कर्त्री
श्रोतृ = श्रोत्री
हर्तृ = हर्त्री
भर्तृ = भर्त्री
जनयितृ = जनयित्री
नप्तृ = नप्त्री
୩. विशेष नियम (रुकारान्त, इकारान्त, जाति, उकारान्त)
ରୁକାରାନ୍ତ ପଦ ଶେଷରେ डीप् —
अग्नि = अग्नायी
वृषाकपि = वृषाकपायी (वृषाकपि: ଶିବ/ବିଷ୍ଣୁ/ଇନ୍ଦ୍ର; वृषाकपायी: ପାର୍ବତୀ/ଲକ୍ଷ୍ମୀ/ଶଚୀ)
कुसीद = कुसीदायी (ସୁଧଖୋର ବ୍ୟକ୍ତିର ସ୍ତ୍ରୀ) / कुसीदा (ସୁଧଖୋର ସ୍ତ୍ରୀ)
‘पति’ — ଯଜ୍ଞର ଫଳଭାଗିତ୍ୱ (ପତ୍ନୀ ଭାବ) ବୁଝାଇଲେ पत्नी, ଅନ୍ୟତ୍ର ‘पतिः’ —
पति = पत्नी / पतिः (ମାଲିକାଣୀ)
राष्ट्रपति = राष्ट्रपतिः
सभापति = सभापतिः
सेनापति = सेनापतिः
ମନେରଖଯଜ୍ଞର ଫଳଭାଗିତ୍ୱ (ପତ୍ନୀ-ଭାବ) ବୁଝାଇଲେ ‘पति’ ଶବ୍ଦର ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ पत्नी ହୁଏ; ଅନ୍ୟତ୍ର ହୁଏ ନାହିଁ।
‘इ’କାରାନ୍ତ ପଦରୁ डीप् (ଦୀର୍ଘ) / ବିକଳ୍ପ —
मुनि = मुनी / मुनिः
सारथि = सारथी / सारथिः
अतिथि = अतिथी / अतिथिः
कपि = कपी / कपिः
अहि = अही / अहिः
ଜାତିବାଚକ ‘ई’କାରାନ୍ତ — ଅର୍ଥ ଅନୁସାରେ ଦୁଇ ରୂପ —
क्षत्रिय = क्षत्रिया/क्षत्रियाणी (କ୍ଷତ୍ରିୟଜାତୀୟା ସ୍ତ୍ରୀ), क्षत्रियी (କ୍ଷତ୍ରିୟର ସ୍ତ୍ରୀ)
बैश्य = बैश्या (ଜାତୀୟା), बैश्यी (ବୈଶ୍ୟର ସ୍ତ୍ରୀ)
शूद्र = शूद्रा (ଜାତୀୟା), शूद्री (ଶୂଦ୍ରର ସ୍ତ୍ରୀ)
गोप = गोपा (ଜାତୀୟା), गोपी (ଗୋପର ସ୍ତ୍ରୀ)
ମନେରଖମନୁଷ୍ୟର ଜାତି ବୁଝାଇଲେ ଉଭୟ टाप् (आ) ଓ डीप् (ई) ହୁଏ, ମାତ୍ର ଅର୍ଥ ବଦଳିଯାଏ। ‘ब्राह्मण’ ଶବ୍ଦର ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗରେ ब्राह्मणी, ମାତ୍ର ‘ब्रह्मन्’ ଶବ୍ଦର ब्रह्माणी ହୁଏ।
ଉକାରାନ୍ତ ପଦରେ ବିକଳ୍ପରେ डीप् —
मृदु = मृदुः / मृद्वी
गुरु = गुरुः / गुर्वी
पटु = पटुः / पट्वी
लघु = लघुः / लघ्वी
तनु = तनुः / तन्वी
साधु = साधुः / साध्वी
୪. आनीप् (आनी) ପ୍ରତ୍ୟୟ
ମନେରଖइन्द्र ଆଦି କେତେକ ଦେବବାଚକ ପଦରୁ आनीप् (आनी) ପ୍ରତ୍ୟୟ ଲାଗି ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ ହୁଏ।
इन्द्र = इन्द्राणी
भव = भवानी
शर्व = शर्वाणी
वरुण = वरुणानी
रुद्र = रुद्राणी
मृड = मृडानी
ସେହିପରି (ଅର୍ଥ-ଭେଦ ସହ) —
यव = यवानी (ଦୁଷ୍ଟ: यवः)
यवन = यवनी (ଯବନର ସ୍ତ୍ରୀ) / यवनानी (ଯବନମାନଙ୍କ ଲିପି)
हिम = हिमानी (ବିରାଟ ହିମ)
अरण्य = अरण्यानी (ବିରାଟ ଅରଣ୍ୟ)
କେତେକ ‘आनीप्’ ପ୍ରତ୍ୟୟାନ୍ତ ପଦ — ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ ହେଲେ ଅର୍ଥ ପରିବର୍ତ୍ତନ —
उपाध्याय = उपाध्याया (ସ୍ୱୟଂ ଶିକ୍ଷୟିତ୍ରୀ), उपाध्यायी / उपाध्यायानी (ଉପାଧ୍ୟାୟର ସ୍ତ୍ରୀ)
आचार्य = आचार्या (ସ୍ୱୟଂ ଅଧ୍ୟାପିକା), आचार्यानी (ଆଚାର୍ଯ୍ୟର ସ୍ତ୍ରୀ)
पाणिगृहीत = पाणिगृहीता (ରକ୍ଷିତା ସ୍ତ୍ରୀ), पाणिगृहीती (ବିବାହିତା ସ୍ତ୍ରୀ)
सूर्य = सूर्या (ସୂର୍ଯ୍ୟର ଦେବୀ ସ୍ତ୍ରୀ), सूरी (ସୂର୍ଯ୍ୟର ମାନବୀ ସ୍ତ୍ରୀ)
स्थल = स्थला (କୃତ୍ରିମ ଭୂମି), स्थली (ଅକୃତ୍ରିମ ଭୂମି)
୫. भिन्नरूप, संख्यावाचक ଓ सर्वनाम
କେତେକ ପଦର ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ ରୂପ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଭିନ୍ନ ହୁଏ —
श्वशुर = श्वश्रूः
पिता = माता
पुत्र = पुत्री
श्वन् = शुनी
मघवत् = मघोनी / मघवती
युवत् = युवती
युवन् = युवतिः / यूनी
भवतु (भवत्) = भवती
मातुल = मातुली / मातुलानी
राजन् = राज्ञी
समाज् = सम्राज्ञी
महाराज = महाराज्ञी
मनु = मनायी / मनावी
पतिवत् = पतिव्नी (ସଧବା ନାରୀ), पतिमती (ପ୍ରଭୁଯୁକ୍ତା ଭୃତ୍ୟା / ଧରଣୀ)
ସଂଖ୍ୟାବାଚକ ଓ ସର୍ବନାମ ଶବ୍ଦର ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ —
एक (एकः) = एका
इदम् (अयम्) = इयम्
किम् (कः) = का
द्वि (द्वौ) = द्वे
तद् (सः) = सा
सर्व = सर्वा
त्रि (त्रयः) = तिस्रः
एतद् (एषः) = एषा
बिश्व = बिश्वा
चतुर (चत्वारः) = चतस्रः
यद् (यः) = या
सम = समा
ମନେରଖ(i) କେତେକ ଦ୍ୱିଗୁ ସମାସନିଷ୍ପନ୍ନ ପ୍ରାତିପଦିକରୁ डीप् (ई) ହୁଏ — ଯଥା त्रिलोकी, अष्टाध्यायी, सप्तशती। (ii) ‘अन्तर्वत्’ ପଦରୁ अन्तर्वत्नी (ଗର୍ଭବତୀ ନାରୀ) ହୁଏ। (iii) ‘पति’ ପଦ ଲାଗିଥିବା ବହୁବ୍ରୀହି ସମାସରେ डीप् ଲାଗେ — सपत्नी (ସମାନଃ ପତିଃ ଯସ୍ୟାଃ), एकपत्नी, बीरपत्नी।
📌 ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗରେ डीप् ଓ ङीष् ପ୍ରତ୍ୟୟ ବ୍ୟାକରଣଶାସ୍ତ୍ର ଅନୁସାରେ ଭିନ୍ନ ଭିନ୍ନ ଶବ୍ଦରେ ଲାଗେ; ମାତ୍ର କୋମଳମତି ଛାତ୍ରଙ୍କ ପାଇଁ ପାଠ୍ୟପୁସ୍ତକରେ ତାହାକୁ କେବଳ डीप् (ई) ଆକାରରେ ଦିଆଯାଇଛି।
💡 ଉତ୍ସ: BSE ଓଡ଼ିଶା ଦଶମ ଶ୍ରେଣୀ ସଂସ୍କୃତ ବ୍ୟାକରଣ (संस्कृतव्याकरणप्रकाशः) — ଅଧ୍ୟାୟ ୧ ‘स्त्रीप्रत्यय’ (ପୃଷ୍ଠା ୧–୯)।