Odisha Board Class 10 · हिन्दी (हिन्दी सौरभ) · पूर्णांक 100 · समय 2:30 घं. · 50 MCQ + विषयनिष्ठ
हिन्दी — आदर्श प्रश्न-पत्र (सेट 2) · पूर्णांक 100 · समय 2 घं. 30 मि.
बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन, ओड़िशा (BSE Odisha) के 2026 प्रश्न-पैटर्न पर आधारित। पूरे पाठ्यक्रम (6 पद्य + 5 गद्य) से कठिन (HOTS) प्रश्न।
अंक-विभाजन एक नज़र में — खण्ड क (वस्तुनिष्ठ): 50 MCQ × 1 = 50। खण्ड ख (विषयनिष्ठ): 5 प्रश्न × 10 = 50। कुल = 100।
खण्ड — क : वस्तुनिष्ठ प्रश्न (50 × 1 = 50)
निम्नलिखित 50 बहुविकल्पीय प्रश्नों के सही उत्तर चुनिए। 👉 ऊपर “🎯 वस्तुनिष्ठ (50)” टैब पर जाकर इन्हें ऑनलाइन हल करें।
खण्ड — ख : विषयनिष्ठ प्रश्न (5 × 10 = 50)
प्रश्न 1. (क) गद्य आधारित — किसी एक का उत्तर लगभग 6-7 वाक्यों में : (5)
(i) ‘मधुर भाषण’ निबंध के आधार पर बताइए कि मधुर वाणी का मानव-जीवन में क्या महत्त्व है? अथवा
(ii) ‘जननी जन्मभूमि’ पाठ में कलिंग के शौर्य का वर्णन कीजिए।
(ख) पद्य आधारित — किसी एक का उत्तर दीजिए : (5)
(i) ‘काँटे कम-से-कम मत बोओ’ कविता का मूल संदेश क्या है? अथवा
(ii) ‘अनमोल वाणी’ के दोहों से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
प्रश्न 2. निबंध — किसी एक विषय पर लगभग 200 शब्दों में निबंध लिखिए : (10)
(i) विद्यार्थी जीवन (ii) समय का महत्त्व (iii) दूरदर्शन : लाभ और हानि
प्रश्न 3. (क) पत्र — किसी एक पर पत्र लिखिए (लगभग 100 शब्द) : (5)
(i) बीमार मित्र का हालचाल पूछते हुए पत्र। अथवा (ii) पिताजी से परीक्षा-शुल्क हेतु धन मँगाते हुए पत्र।
(ख) आवेदन — किसी एक पर आवेदन-पत्र (लगभग 100 शब्द) : (5)
(i) विद्यालय में खेल-सामग्री हेतु प्रधानाध्यापक को आवेदन। अथवा (ii) शुल्क-माफी हेतु आवेदन।
प्रश्न 4. अनुवाद — निम्नलिखित अंग्रेजी वाक्यों का हिन्दी में अनुवाद कीजिए : (5 × 2 = 10)
(i) Knowledge is power.
(ii) The cow gives us milk.
(iii) We must save water.
(iv) He is reading a book.
(v) Unity is strength.
प्रश्न 5. (i) अपठित गद्यांश — पढ़कर प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए : (5 × 1 = 5)
परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। जो व्यक्ति परिश्रम करता है, वह अपने जीवन में अवश्य उन्नति करता है। आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। परिश्रमी व्यक्ति कठिनाइयों से नहीं घबराता, बल्कि उनका डटकर सामना करता है। संसार में जितने भी महान कार्य हुए हैं, वे सब परिश्रम का ही फल हैं। बिना परिश्रम के भाग्य भी साथ नहीं देता।
(क) सफलता की कुंजी क्या है?
(ख) मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु कौन है?
(ग) परिश्रमी व्यक्ति कठिनाइयों का सामना कैसे करता है?
(घ) संसार के महान कार्य किसका फल हैं?
(ङ) गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
(ii) गद्य आधारित — ‘गिल्लू’ ने लेखिका की अस्वस्थता में किस प्रकार सेवा की? (2½)
(iii) पद्य आधारित — ‘मनुष्यता’ कविता में ‘सर्वत्र एक ईश्वर’ का क्या भाव है? (2½)
👉 इन सभी विषयनिष्ठ प्रश्नों के आदर्श उत्तर ऊपर “✍️ आदर्श उत्तर” टैब में दिए गए हैं।
खण्ड ख — विषयनिष्ठ प्रश्नों के आदर्श उत्तर
ये नमूना-उत्तर हैं — परीक्षा में अपने शब्दों में, स्वच्छ व क्रमबद्ध लिखें।
1(क)(i)‘मधुर भाषण’ — मधुर वाणी का महत्त्व।
गुलाबराय के अनुसार मधुर वाणी मनुष्य का सबसे बड़ा आभूषण है। मीठे वचन बिना मूल्य दिए दूसरों को प्रसन्न कर देते हैं और शत्रु को भी मित्र बना लेते हैं। मधुर भाषण से समाज में प्रेम, सद्भाव और आदर बढ़ता है, जबकि कटु वचन बैर और दुःख उत्पन्न करते हैं। वाणी की मधुरता वश में करने की शक्ति रखती है — इसी से व्यक्ति सर्वप्रिय बनता है। अतः हमें सदा सोच-समझकर मीठे व विनम्र वचन बोलने चाहिए।
1(क)(ii)‘जननी जन्मभूमि’ — कलिंग का शौर्य।
ईस्वी पूर्व तीसरी शताब्दी में कलिंग के वीर सैनिकों ने विशाल मगध-सेना के दाँत खट्टे कर दिए और सम्राट अशोक का डटकर मुकाबला किया — ‘जानें दीं, पर जमीन नहीं दी’। लाखों मरे, ‘दया’ नदी रक्त से लाल हो गई; इस नरसंहार से अशोक घबराकर धर्मशोक बन गया। बाद में सम्राट खारवेल ने मगध को हराकर ‘कलिंग जिन’ वापस लाया — खण्डगिरि-उदयगिरि के शिलालेख उसका यशोगान करते हैं। आधुनिक युग में बक्सि जगबन्धु, सुरेन्द्र साय आदि ने भी अंग्रेजों से लोहा लिया। यही कलिंग के अदम्य शौर्य की अमर कहानी है।
1(ख)(i)‘काँटे कम-से-कम मत बोओ’ — मूल संदेश।
‘अंचल’ जी इस कविता में मानवता और सद्भावना का संदेश देते हैं। ‘काँटे बोना’ अर्थात् दूसरों को दुःख-कष्ट देना, और ‘फूल बोना’ अर्थात् प्रेम व भलाई फैलाना। कवि कहते हैं कि जीवन में कम-से-कम काँटे (द्वेष, बैर) बोओ और अधिक-से-अधिक फूल (स्नेह, सहायता) बोओ, क्योंकि हम जो बोते हैं वही काटते हैं। संसार को सुंदर व सुखमय बनाने के लिए घृणा छोड़कर प्रेम व सद्भाव फैलाना चाहिए।
1(ख)(ii)‘अनमोल वाणी’ के दोहों की शिक्षा।
‘अनमोल वाणी’ में कबीर, सूर, तुलसी व रहीम के दोहे-पद संकलित हैं, जो जीवन की अनमोल सीख देते हैं — मधुर व विनम्र वाणी बोलना (‘ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय’), अहंकार त्यागना, सच्ची भक्ति व सत्संग करना, तथा प्रेम और संबंधों को सँभालकर रखना (‘रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय’)। ये दोहे सिखाते हैं कि बिगड़ी बात और टूटा प्रेम फिर नहीं जुड़ते, अतः सदा सद्व्यवहार करना चाहिए।
2निबंध — ‘समय का महत्त्व’ (रूपरेखा सहित आदर्श निबंध)।
रूपरेखा : प्रस्तावना → समय की विशेषता → सदुपयोग के लाभ → दुरुपयोग की हानि → उपसंहार।
समय संसार की सबसे मूल्यवान वस्तु है। धन खोकर फिर कमाया जा सकता है, पर बीता हुआ समय कभी लौटकर नहीं आता। समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता; वह निरंतर आगे बढ़ता रहता है। जो व्यक्ति समय का सदुपयोग करता है, वह विद्या, धन और यश सब कुछ प्राप्त कर लेता है। संसार के सभी महापुरुषों — गांधी, विवेकानन्द आदि — ने समय के एक-एक क्षण का उपयोग करके ही महानता पाई। इसके विपरीत जो समय नष्ट करता है, वह आलस्य में डूबकर जीवन भर पछताता है; ‘अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत’। विद्यार्थी के लिए तो समय का मूल्य और भी अधिक है। अतः हमें आज का काम कल पर नहीं टालना चाहिए और समय-सारणी बनाकर हर कार्य समय पर करना चाहिए। यही सफलता का मूल मंत्र है।
3(क)पत्र — बीमार मित्र का हालचाल पूछते हुए।
परीक्षा-भवन,
भुवनेश्वर।
दिनांक : __________
प्रिय मित्र सुरेश,
सप्रेम नमस्ते।
कल ही पता चला कि तुम कई दिनों से अस्वस्थ हो और विद्यालय नहीं आ रहे। यह सुनकर मुझे बहुत चिंता हुई। आशा है अब तुम्हारा स्वास्थ्य सुधर रहा होगा। डॉक्टर की सलाह मानना, समय पर दवा लेना और पूरा आराम करना। पढ़ाई की चिंता मत करना — जो पाठ छूट गए हैं, मैं अपनी कॉपी लेकर तुम्हें समझा दूँगा। शीघ्र स्वस्थ होकर विद्यालय आओ। अपने माता-पिता को मेरा प्रणाम कहना।
तुम्हारा प्रिय मित्र,
क. ख. ग.
3(ख)आवेदन — खेल-सामग्री हेतु प्रधानाध्यापक को।
सेवा में,
प्रधानाध्यापक महोदय,
________ उच्च विद्यालय, ________।
विषय : विद्यालय हेतु नई खेल-सामग्री उपलब्ध कराने के लिए आवेदन।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि हमारे विद्यालय में खेल-सामग्री बहुत पुरानी व अपर्याप्त हो चुकी है, जिससे छात्र खेलकूद में भाग नहीं ले पाते। खेल शारीरिक व मानसिक विकास के लिए आवश्यक हैं। अतः आपसे निवेदन है कि फुटबॉल, वॉलीबॉल तथा अन्य आवश्यक खेल-सामग्री शीघ्र उपलब्ध कराने की कृपा करें, जिससे छात्र खेलों में रुचि लें और विद्यालय का नाम रोशन करें।
आपका आज्ञाकारी छात्र,
क. ख. ग. (कक्षा 10, खेल-सचिव)
4अनुवाद (अंग्रेजी → हिन्दी)।
(i) ज्ञान ही शक्ति है।
(ii) गाय हमें दूध देती है।
(iii) हमें जल (पानी) बचाना चाहिए।
(iv) वह एक पुस्तक पढ़ रहा है।
(v) एकता में बल है।
5(i)अपठित गद्यांश के उत्तर।
(क) सफलता की कुंजी परिश्रम है। (ख) मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु आलस्य है। (ग) परिश्रमी व्यक्ति कठिनाइयों से नहीं घबराता, बल्कि उनका डटकर सामना करता है। (घ) संसार के महान कार्य परिश्रम का फल हैं। (ङ) उपयुक्त शीर्षक — ‘परिश्रम का महत्त्व’।
5(ii)‘गिल्लू’ — अस्वस्थता में सेवा।
लेखिका की अस्वस्थता (मोटर दुर्घटना) के समय गिल्लू तकिए पर सिरहाने बैठकर अपने नन्हे पंजों से उनके सिर और बालों को इतने हौले-हौले सहलाता कि उसका हटना एक परिचारिका (सेविका) के हटने जैसा लगता। उन दिनों उसने अपना प्रिय काजू भी बहुत कम खाया — उसका यह व्यवहार उसके गहरे स्नेह और सेवा-भाव को दर्शाता है।
5(iii)‘मनुष्यता’ — ‘सर्वत्र एक ईश्वर’ का भाव।
गुप्त जी कहते हैं कि सारी सृष्टि में एक ही ईश्वर व्याप्त है और सब मनुष्य उसी की संतान हैं — अतः ‘मनुष्य मात्र बन्धु है’। जब सभी में एक ही ईश्वर का वास है, तो किसी से भेदभाव, घृणा या बैर नहीं करना चाहिए, बल्कि सबके प्रति प्रेम, सहानुभूति व भाईचारा रखना चाहिए। यही सच्ची मनुष्यता और एकता का भाव है।