हिन्दी (गद्य) · CBSE Class 9 · गंगा · पाठ 1: दो बैलों की कथा (प्रेमचंद) · 25 क्विज़
पाठ 1 — दो बैलों की कथा (लेखक परिचय, सार, शब्दार्थ)
यह नई NCERT पाठ्यपुस्तक ‘गंगा’ (कक्षा 9) के गद्य खंड का पहला पाठ है — प्रेमचंद की एक मार्मिक कहानी जो किसानों व पशुओं के भावनात्मक संबंध और स्वतंत्रता के महत्व को दर्शाती है।
लेखक परिचय — प्रेमचंद
जन्म सन् 1880, लमही (वाराणसी), उत्तर प्रदेश; मूल नाम धनपत राय। असहयोग आंदोलन में भाग लेने हेतु सरकारी नौकरी छोड़ दी। कहानियाँ ‘मानसरोवर’ के आठ भागों में संकलित; प्रमुख उपन्यास — सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, निर्मला, गबन, कर्मभूमि, गोदान। किसान, मजदूर, दलित, स्त्री और स्वाधीनता-आंदोलन इनकी रचनाओं के मूल विषय हैं। भाषा सरल, जीवंत व मुहावरेदार। निधन सन् 1936।
पाठ-सार
झूरी के दो बैल हीरा और मोती गहरे मित्र हैं और ‘मूक-भाषा’ में एक-दूसरे से भाव बाँटते हैं। झूरी उन्हें अपने साले गया के घर भेज देता है; बैल इसे अपना बेचा जाना/अपमान समझते हैं और पहली ही रात रस्सियाँ तुड़ाकर झूरी के पास लौट आते हैं। झूरी की पत्नी उन्हें ‘नमक-हराम/कामचोर’ कहकर केवल सूखा भूसा देने का आदेश देती है।
गया दुबारा उन्हें ले जाता है और कठोरता से काम लेता है व मारता है; बैल काम करने से इनकार कर देते हैं। वहाँ एक छोटी अनाथ लड़की चोरी-छिपे उन्हें रोटियाँ खिलाती है। एक रात वही लड़की उनकी रस्सी खोल देती है और बैल भाग निकलते हैं। रास्ते में वे एक साँड़ से जान हथेली पर रखकर लड़ते हैं और उसे हरा देते हैं; मटर के खेत में चरते पकड़े जाकर काँजीहौस में बंद कर दिए जाते हैं, जहाँ कई भूखे-बेबस जानवर हैं।
हीरा दीवार तोड़कर सबको छुड़ाने का प्रयास करता है; मोती भी साथ देकर दीवार गिरा देता है और गधों तक को बाहर निकालता है — पर स्वयं पकड़ा जाकर मार खाता है। अंत में दोनों दढ़ियल (कसाई) को नीलाम कर दिए जाते हैं, पर रास्ते में परिचित मार्ग पहचानकर वे सीधे झूरी के द्वार पहुँच जाते हैं। मोती दढ़ियल को सींग से भगा देता है; झूरी और मालकिन दोनों बैलों को गले लगाते हैं और नाँद में खली-भूसा-दाना भर दिया जाता है।
मूल भाव व संदेश: स्वतंत्रता सहज नहीं मिलती — उसके लिए बार-बार संघर्ष करना पड़ता है। कहानी परोक्ष रूप से स्वतंत्रता-आंदोलन से जुड़ी है (हीरा-मोती = संघर्षरत भारतीय जनता के प्रतीक)। साथ ही यह मित्रता, एकता-सहयोग, स्वाभिमान, अहिंसा व करुणा (गिरे शत्रु व स्त्री पर वार न करना) के मूल्यों को उभारती है। कहानी ‘पंचतंत्र/हितोपदेश’ की पशु-कथा परंपरा को आगे बढ़ाती है।
पात्र
हीरा — शांत, सहनशील, विवेकी, धर्मनिष्ठ (गिरे बैरी/स्त्री पर सींग नहीं चलाता), दूरदर्शी। मोती — साहसी, उग्र, भावुक, मित्र के लिए त्यागी। झूरी — स्नेही मालिक; झूरी की पत्नी — कठोर; गया — निर्दयी; छोटी लड़की — करुणामयी।
विधा — कहानी
कहानी वह रचना है जिसमें जीवन के किसी एक अंग या मनोभाव को प्रदर्शित करना लेखक का उद्देश्य होता है; उसके चरित्र, शैली व कथा-विन्यास सभी उसी एक भाव को पुष्ट करते हैं। — प्रेमचंद
शब्द-संपदा (शब्दार्थ)
निरापद = सुरक्षित, निर्विघ्न; सहिष्णुता = सहनशीलता; विषाद = उदासी; पराकाष्ठा = चरम सीमा; पछाइँ = पश्चिमी प्रदेश की (नस्ल); चौकस = सावधान; डील = कद, देह; विग्रह = झगड़ा, फूट; विनोद = मनोरंजन; आत्मीयता = अपनापन; नाँद = पशुओं के चारे-पानी का बड़ा बर्तन; पगहिया = पशु बाँधने की रस्सी; गराँव = गले की फंदेदार रस्सी; काँजीहौस = अनाथ/हरज करने वाले पशुओं को बंद करने का बाड़ा; बूता = सामर्थ्य, बल; रगेदना = खदेड़ना, दौड़ाना; नौ-दो-ग्यारह होना = भाग जाना; उन्मत्त = मतवाला।
अभ्यास — सभी प्रश्न-उत्तर
‘दो बैलों की कथा’ के ‘मेरे उत्तर मेरे तर्क’, ‘मेरी समझ मेरे विचार’, कहानी का सौंदर्य, समय-समाज मिलान, मुहावरे एवं पात्र-विशेषताओं के पूर्ण उत्तर।
1मेरे उत्तर मेरे तर्क — हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को दर्शाता है?
(ख) एकता और सहयोग। दोनों मिल-जुलकर बोझ बाँटते, एक-दूसरे की थकान मिटाते, साँड़ व काँजीहौस के संकट में साथ देते और विपत्ति में एक-दूसरे को नहीं छोड़ते — यह एकता व सहयोग का भाव है।
2हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?
(ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा। उन्हें लगा कि झूरी ने उन्हें बेच दिया; इस आहत सम्मान के कारण उन्होंने गया के यहाँ नाँद में मुँह तक न डाला और लौट आए।
3बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?
(घ) अपनापन पाने के लिए। झूरी के घर, गाँव व परिवेश से उनका गहरा लगाव था; नया घर उन्हें ‘बेगाना’ लगा, इसलिए अपनेपन की ओर लौट आए।
4गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है?
(क) स्वाभिमान। अकारण अपमान व मार सहन न कर पाना आत्मसम्मान की रक्षा की भावना दर्शाता है।
5बैलों की ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग लेखक ने किसलिए किया?
(ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए। इससे बैल केवल पशु नहीं, बल्कि भाव, विवेक, मित्रता व विद्रोह रखने वाले चेतन पात्र बन जाते हैं।
6कहानी को स्वतंत्रता-आंदोलन से जोड़ें तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हैं?
(घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के। बंधन तोड़ना, मार सहकर भी झुकना नहीं, बार-बार संघर्ष करना — यह पराधीन भारत की संघर्षशील जनता का प्रतीक है।
MSमेरी समझ मेरे विचार
1. बैलों ने काम करने से इनकार इसलिए किया क्योंकि अपने घर से बिछुड़ने का दुख, बिकने का अपमान और गया की कठोरता व सूखे भूसे ने उनमें विद्रोह भर दिया था। 2. बैलों का लौट आना साधारण नहीं — मोटी रस्सियाँ तोड़कर, अनजान रास्ते से अकेले लौट आना उनके असाधारण स्नेह, बुद्धि व घर-लगाव को दिखाता है; झूरी स्नेह से गदगद हो उठा, बच्चों ने स्वागत किया। 3. ‘संघर्ष आवश्यक है’ — बैल काम करने से इनकार करते हैं, रस्सी तोड़ते हैं, साँड़ से लड़ते हैं, काँजीहौस की दीवार गिराते हैं — हर बार संघर्ष से ही मुक्ति/सम्मान मिलता है। 4. दोनों भावनाओं में से ‘अपनापन’ अधिक प्रबल था — स्वतंत्रता पाकर भी वे बार-बार झूरी के घर की ओर ही लौटते हैं; घर व स्नेह उनका अंतिम लक्ष्य है। 5. ‘अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है’ — सहमति दी जा सकती है: बैल जब अन्याय का विरोध (इनकार, विद्रोह) करते हैं तभी स्थिति बदलती है; चुप सहना अन्याय को बढ़ावा देता है। 6. भाईचारे के प्रमाण — (i) बोझ अपनी गरदन पर अधिक लेने की होड़, (ii) एक-दूसरे को चाटकर थकान मिटाना, (iii) साँड़ से मिलकर लड़ना, (iv) मोती का हीरा को संकट में न छोड़ना। 7. मालकिन पहले कठोर व निर्मम थी (सूखा भूसा), जबकि छोटी लड़की करुणामयी (चोरी-छिपे रोटियाँ); अंत में मालकिन का हृदय भी बदल जाता है और वह बैलों के माथे चूम लेती है।
KAमेरी कल्पना मेरे अनुमान / मेरे अनुभव
कल्पना 1: लड़की होने पर मैं भी चुपचाप भोजन देता/देती, रस्सी खोलकर सुरक्षित भगाता और किसी पर संदेह न जाने देता। कल्पना 2: सहमति — भय व संकोच अवसर मिलने पर भी रोक लेते हैं; जैसे काँजीहौस के गधे दरवाजा खुला होने पर भी डर से नहीं भागे। (अपना उदाहरण जोड़ें।) अनुभव: (i) घनिष्ठ मित्रता में हँसी-ठिठोली—सहमति, क्योंकि इससे अपनापन व विश्वास बढ़ता है; (ii) हीरा के विचार (गिरे बैरी/स्त्री पर वार न करना) से सहमति, क्योंकि वह अहिंसा व मर्यादा सिखाता है; (iii) संकट में मित्र/परिजन के साथ का अपना अनुभव लिखें।
KSकहानी का सौंदर्य — भाषिक विशेषताएँ (उदाहरण सहित)
चित्रात्मक भाषा: ‘घुटने तक पाँव कीचड़ से भरे हैं’; ‘दोनों सिर झुकाकर उसका हाथ चाटने लगे, पूँछें खड़ी हो गईं।’ संवादात्मकता: ‘मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा।’ विरोधाभास: झूरी स्नेह से गदगद — झूरी की स्त्री जल उठी। व्यंग्य: ‘अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते, तो शायद सभ्य कहलाने लगते।’ संघर्ष: बैल बनाम साँड़। अतिशयोक्ति: ‘झूरी की टिटकार पर दोनों उड़ने लगते थे।’ अन्य: मुहावरेदार, सजीव भाषा पूरी कहानी को प्रभावशाली बनाती है।
STकहानी का समय और समाज — स्वतंत्रता-आंदोलन से मिलान
1. ‘जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ।’ → 6 (सेनानी बार-बार जेल गए, पर संघर्ष न छोड़ा)। 2. ‘मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा।’ → 5 (प्राण देना स्वीकार्य, पर अंग्रेजों की सेवा अस्वीकार्य)। 3. ‘हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता।’ → 4 (दासता में भारतीयों के प्राण/सम्मान की महत्ता नहीं)। 4. ‘दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा था।’ → 2 (विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया)। 5. ‘नौ-दस प्राणियों की जान बच गई, वे आशीर्वाद देंगे।’ → 1 (क्रांतिकारियों के बलिदान से प्रेरणा जगी)। 6. ‘साँड़ पूरा हाथी है…पर दोनों जान हथेली पर लेकर लपके।’ → 3 (शक्तिशाली ब्रिटिश साम्राज्य का साहसपूर्वक सामना)।
MUभाषा गढ़ते मुहावरे — अर्थ
1. दाँतों पसीना आना = बहुत परिश्रम करना। 2. दिल काँप उठना = भयभीत होना। 3. जल उठना = क्रोध/ईर्ष्या से भर जाना। 4. दिल में ऐंठकर रह जाना = मन मसोसकर रह जाना। 5. खबर लेना = दंड देना/सबक सिखाना। 6. गम खाना = सह जाना। 7. ईंट का जवाब पत्थर से देना = करारा उत्तर देना। 8. नौ-दो-ग्यारह होना = भाग जाना। (प्रत्येक का अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए।)
AVअलग-अलग और साथ-साथ — हीरा व मोती की विशेषताएँ
हीरा: शांत, अधिक सहनशील, विवेकी, दूरदर्शी, धर्मनिष्ठ (गिरे बैरी व स्त्री पर वार नहीं करता)। मोती: साहसी, गुस्सैल, उग्र, भावुक, मित्र के लिए त्यागी। दोनों की भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे की पूरक हैं — हीरा का संयम मोती के आवेश को संभालता है, और मोती का साहस हीरा की रक्षा करता है; इसी संतुलन से वे हर संकट पार करते हैं।
PTपशुओं के लिए कानून / न्याय-अन्याय
काँजीहौस में बंद होना न्याय भी है (दूसरे का खेत चरने पर नियमानुसार पकड़ना) और अन्याय भी (भूखे पशुओं को चारा-पानी न देना, कमजोर व बेबस छोड़ देना)। बैलों की ओर से माँगे जा सकने वाले अधिकार — भरपेट चारा-पानी, उचित विश्राम, निर्दय मार पर रोक, और बिना स्वामी की अनुमति नीलाम न करना। (थानाध्यक्ष को शिकायती-पत्र भी लिखा जा सकता है — ‘थानाध्यक्ष महोदय, हमारे साथ अन्याय हुआ है…’।)